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इलाहाबाद

यहां सावन में हर साल होती है घोड़ों की रेस, कोरोना ने कर दी रौनक फीकी

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कोरोना के कारण इस बार सावन की रौनक काफी फीकी हो गयी है। इसका प्रभाव इस बार संगम नगरी में आयोजित पारम्परिक गहरेबाजी में साफ दिखा। भगवान शिव के आराधना का महामास श्रावण मास शुरू हो गया है। सावन के पहले दिन पहले सोमवार पर संगम नगरी प्रयागराज में प्रचीन काल से होने वाली गहरेबाजी घोड़ो की दौड़ इसबार भी शाम को हुई।

गहरेबाजी प्रतियोगिता का आयोजन सावन के हर सोमवार को किया जाता है। जीतने वाले घोड़े को इनाम भी दिया जाता है। खास बात यह है कि घोड़ो के रेस की परम्परा काफी समय से चली आ रही है। इस दौड़ में सभी वर्ग और समुदाय के लोग भाग लेते हैं। संगम नगरी में इसे हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक के तौर पर भी देखा जाता है । घोड़ो की दौड़ जब शुरू होती है तो एक अलग ही नजारा दिखाई देता है।

दौड़ते हुए घोड़े हवा से बात करते हैं। उस समय का यह एक अदभुत नजारा होता है जिसका लोग खूब जम कर आनंद उठाते हैं । इस रेस के लिए घोड़ों को सालभर तैयार किया जाता है। हालांकि इसबार कोरोना वायरस की वजह से प्रशासन से परमीशन ना मिलने पर भी इस गहरे बाजी का आयोजन हुआ। लेकिन इसमें केवल 4 घोड़ों ने भाग लिया।

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