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15 अगस्त को मेजर ध्यानचंद ने हिटलर का ये प्रस्ताव ठुकरा कर कहा “भारत बिकाऊ नहीं है”

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हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद ने 15 अगस्त के दिन ही जर्मनी के तानाशाह शासन एडॉल्फ हिटलर का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। ध्यानचंद का जवाब सुन एक बार तो दर्शकों से भरा खचाखच स्टेडियम सन्न रह गया।

लगा कि कहीं हिटलर उनकी हत्या ना कर दे, लेकिन हिटलर की प्रतिक्रिया को देख पूरे दर्शक के साथ भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ी भी दंग रह गए।

इसमें सबसे खास बात ये है कि आज 15 अगस्त के दिन ही भारतीय हॉकी टीम ने जर्मनी को उसी के देश में हरा कर ओलंपिक चैंपियन बनी थी।

बात 84 साल पुरानी 1936 में बर्लिन में हुए ओलम्पिक की है। भारत और जर्मनी के बीच 15 अगस्त 1936 को बर्लिन में हॉकी का फाइनल मैच था।

फाइनल मुकाबले को देश के लिए स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भरा था। दौर तानाशाह एडॉल्फ हिटलर का था। फाइल मुकाबला देखने खुद हिटलर आने वाले थे।

इसके कारण दर्शकों में फाइनल मुकाबला देखने की खुशी के साथ माहौल तनावपूर्ण भी था। सेमीफाइनल मुकाबले में फ्रांस को बुरी तरह हराने के बाद भारतीय टीम का हौसला काफी बुलन्द था।

फाइल मुकाबले में भी मेजर ध्यानचंद ने अपना शानदार जलवा दिखाया। भारत 8-1 से फाइनल जीत गया। इसमें मेजर ध्यानचंद ने 6 गोल किये थे। स्वर्ण पदक भारतीय टीम जीत चुका था।

अब जो होने जा रहा था उसके आगे स्वर्ण पदक भी बौना हो जाये। मुकाबले के बाद हिटलर भी मैदान में ध्यानचंद के खेल का मुरीद हो गया। उसने मेजर ध्यानचंद को सलाम किया।

इसके साथ ही उसने मेजर को जर्मनी की सेना में शामिल होने का प्रस्ताव दिया। ये सब ओलम्पिक खेल के पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान हो रहा था।

मेजर ध्यानचंद हिटलर का प्रस्ताव सुनने के बाद कुछ देर शांत रहे। मेजर की शांति लोगों के मन को चीरने लगी। लोगों को लगा अगर मेजर ने प्रस्ताव कहीं ठुकरा दिया तो तानाशाह कहीं उनका कत्ल ना कर दे।

उन्होंने हिटलर से सख्त आवाज में कहा कि “भारत बिकाऊ नहीं है” मेजर की बात सुनते ही स्टेडियम में सन्नाटा पसर गया। लोगों के मन में सवाल उठने लगा कि प्रस्ताव ठुकराने का नतीजा क्या होगा?

इस दौरान हैरानी की बात यह दिखी कि पूरा स्टेडियम और हिटलर खुद मेजर का जवाब सुनकर सलाम किया। इसके साथ ही हिटलर ने कहा “जर्मन राष्ट्र आपको, आपके देश और राष्ट्रवाद के प्यार के लिए सलाम करता है।”

इस दौरान एडॉल्फ हिटलर ने ही मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा। हिटलर ने ही उन्हें हॉकी के जादूगर होने का तमगा दिया है।

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