Connect with us

बिहार

सांसद की बेलगाम अफसर बिटिया को जनरल डायर का मिला तमगा, नीतीश भी निशाने पर

Published

on

खबर शेयर करें

बिहार के मुंगेर में दुर्गा विसर्जन करने जा नौजवानों पर फायरिंग की घटना ने बिहार सीएम नीतीश कुमार के करीबी राज्यसभा सांसद आरपी सिंह की अफसर बिटिया पर लगा लेडी सिंघम का तमगा उतार लेडी जनरल डायर जैसा कलंक लगा दिया है।

बेलगाम अफसर बीटिया पर बिहार के चुनावी दौर में गोलीबारी के आरोप लगे हैं। सोशल मीडिया पर भी आईपीएस लिपि सिंह की छीछालेदर हो रही है।
आखिर जब पापा राज्यसभा सांसद हो, प्रदेश के मुख्यमंत्री के करीबी हों और पति आईएएस अफसर हों और खुद आईपीएस अधिकारी तो बेलगाम होने में कितनी देर लगती है।

बिहार की लिपि सिंह 2016 बैच की वही आईपीएस अफसर हैं जिन्हें बिहार की नीतीश समर्थित मीडिया ने रातोरात लेडी सिंघम का तमगा दिया था। सरकार की लगाम हाथ में होने की बेपरवाही ने लिपि सिंह को इस कदर बेलगाम कर दिया कि बदनाम होते देर नहीं लगी।

मुंगेर के दीनदयाल चैक पर मां दुर्गा के विसर्जन के लिए नौजवानो का जत्था जा रहा था। पुलिस उस जत्थे के साथ चल रही थी। अचानक भगदड मची। चैक खाली होने लगता है और पुलिस गुंडों की तरह नौजवानों पर लाठियां भांजने लगती है। पुलिस के साथ शामिल हो जाते हैं सादी वर्दी वाले गुंडे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक पुलिस वाले ने मैडम से पूछा आगे क्या कार्रवाई की जाए? दूसरी तरफ से पुलिस वालों को दंडात्मक कार्रवाई करने का फरमान जारी होता है। कहा जा रहा है वो काॅल लिपि सिंह के पास किया गया था। आरोप है कि उसी काॅल के बाद मुंगेर पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी।

उस फायरिंग में 18 साल के नौजवान अनुराग कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि करीब दर्जनभर लोग घायल हो गए। माना जा रहा है कि पुलिस और गुंडो की इस मिलीभगत की जिम्मेदार आईपीएस लिपि सिंह हैं। देखते ही देखते जिसे बिहार की मीडिया ने लेडी सिंघम का तमगा दिया था।

उस पर बिहार की लेडी जनरल डायर का तमगा लगते देर नहीं लगी। वही जनरल डायर जिसने जलिया वाला बाग में आजादी के परवानों को घेर कर उनपर अंधाधुन फायरिंग करवा दी थी। आपको बता दें कि यह साधारण मामला नहीं है ये लिपि सिंह और उनके आईपीएस पति सुहर्ष भगत पर चुनाव आयोग की रहमतों की बारिश का मामला है। क्योंकि सब जानते हैं कि लिपि सिंह राज्यसभा सांसद की बेटी हैं और सत्ताधारी राज्यसभा सांसद जेडीयू के सांसद हैं।

उनकी मर्जी के बगैर जेडीयू में एक पत्ता तक नहीं हिलता। बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार और उनकी नजदीकियां जेडीयू के नेताओं को खटकती हैं। बावजूद इसके चुनाव आयोग को क्यों नहीं खटकती? क्यो चुनाव आयोग को पता नहीं है कि लिपि सिंह आरसीपी सिंह की बेटी हैं? क्या चुनाव आयोग को ये भी नहीं पता कि सुहर्ष भगत आरपी सिंह के दामाद हैं?

क्या चुनाव यह भी नहीं जानती कि लिपि सिंह मुगेर की एसपी हैं और सुहर्ष भगत पडोस के बाका के जिलाधिकारी? तो चुनाव आयोग को ये भी पता होगा कि दोनों की राजनैतिक निष्ठाएं संदेह के दायरे में हैं। चुनाव आयोग को उस परंपरा को भी नहीं भूलना चाहिए जिसके अनुसार चुनाव से पहले राजनेताओं के परिवारों से नजदीकी रखने वाले अफसरों को चुनावी प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल पदों से हटा कर कहीं और तैनात किया जाता है।

बावजूद इसके लिपि सिंह को सुरक्षा की सबसे बडी कमान और उनके पति को जिला निर्वाचन पदाधिकारी की कुर्सी पर बरकरार रखा गया है। सवाल है कि चुनाव आयोग की उन पर इतनी कृपा क्यों बरस रही है? चुनावी काम में दखल देने वाली कुर्सियों से आखिर उन्हें हटाया क्यों नहीं?

कहा जाता है कि लिपि सिंह इतनी जल्दी मशहूर ही इसलिए हुई कि पापा आरपी सिंह नीतीश बाबू के दाहिने हाथ हैं और वो राज्य की नौकरशाही को जैसे चाहें वैसे चला सकते हैं। लिपि सिंह जब से आईपीएस बनी हैं तब से उनकी ट्रेनिंग से लेकर पोस्टिंग तक पापा के आसपास ही रही। उनके पति आईपीएस सुहर्ष भी बांका के डीएम हैं।

पति पत्नी सीधे तौर पर चुनाव के काम में लगे हुए हैं। बावजूद इसके चुनाव आयोग ने उन्हें चुनावी प्रक्रिया से अलग नहीं किया क्योंकि दोनों आरपी सिंह के करीबी रिश्तेदार हैं और आरसीपी सिंह नीतीश कुमार के आंख कान नाक हैं।

बाहुबली पर कार्रवाई करने पर आईं थी चर्चा में


लिपि सिंह पहली बार चर्चा में तब आई थी जब उन्होंने मोकामा के बाहुबली और निर्दलीय विधायक अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की थी। उन्होंने अनंत सिंह की हवेली में छापा मार कर एक एके 47 बरामद किया। उसके बाद से ही अनंत सिंह जेल में हैं।

मोकामा में आईपीएस तो तमाम आए लेकिन अनंत सिंह की हवेली में घुसने की हिम्मत किसी की नहीं हुई थी। इसलिए जब लिपि सिंह ने कार्रवाई की थी तो कहा गया कि बेटी ने पिता को राजनैतिक उपहार दिया है। मजे की बात ये है कि जिस समय लिपि सिंह ने बाहुबली विधायक अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की थी वो एएसपी हुआ करती थी।

मतलब कायदे से उन्होंने एसएसपी और एसपी के निर्देश पर ये छापा मारा होगा लेकिन इस कार्रवाई का सारा के्रडिट लिपि सिंह ने लूट लिया। लिपि सिंह की इस कार्रवाई को उत्सव में बदलने के लिए तैयार मीडिया ने रातोरात उन्हें लेडी सिंघम बना दिया। नतीजा बिहार सरकार ने लिपि सिंह को पदोन्नत करके मुंगेर का पुलिस कप्तान बना दिया।  

Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
Advertisement

Trending