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उत्तरप्रदेश

Valentine Day: वैलेंटाइन डे के दिन भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी के दावे की जानिए सच्चाई

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वैलेंटाइन डे (Valentine Day) पर भगत सिंह  (Bhagat Singh), राजगुरू(Rajguru) और सुखदेव (Sukhdev) को फांसी का मैसेज सोशल मीडिया (Valentine’s Day message on social media) पर तेजी से वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया (message on social media)  की बात लोगों के जुबान और दिमाग में भी तेजी से दौड़ रही है। आखिर 14 फरवरी (14 February) यानी वैलेंटाइन डे का भगत सिंह, राजगुरू या सुखदेव की फांसी से क्या संबंध (Valentine’s Day related to the hanging of Bhagat Singh, Rajguru or Sukhdev) है और कहां तक है? 

उत्तर प्रदेश (Uttar pradesh) के गाजीपुर (Ghazipur) स्थित शादियाबाद कस्बे में एक सत्संग का कार्यक्रम चल रहा है। सत्संग में मौजूद सभी वर्ग के श्रोताओं से पंडित जी सवाल करते हैं कि 14 फरवरी को क्या है? सवाल सुनकर मौजूद लोगों के चेहरे पर हंसी आ जाती है। मौजूद लड़के तो ठहाके लगाने से खुद को नहीं रोक पाते। तभी पंडित जी कहते हैं हंसते क्या हो? खुल कर बोलो। तुम्हारे मन में जो वैलेंटाइन डे घुम रहा है, समझ रहा हूं। उन्होंने कहा ये वैलेंटाइन डे पश्चिम की सभ्यता है जो हमारे देश की संस्कृति को बर्बाद करने के लिए विदेश से लायी गई है। 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे तो सबको याद है लेकिन उस दिन देश को आजादी दिलाने के लिए भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को फांसी की सजा सुनाई गई थी। वह किसी को याद नहीं, तो याद रखिए 14 फरवरी वैलेंटाइन डे नहीं बल्कि बलिदान दिवस के रूम में मनायें। इससे देश का कल्याण होगा।

वहीं दूसरी ओर 14 फरवरी से पहले ही सोशल मीडिया और वाट्सएप्प पर एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। मैसेज में लिखा है आज का युवा वैलेंटाइन डे के जोश में…यह भूल रहा है… आज ही अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को फांसी की सजा सुनाई गई थी

राजू श्रीवास्तव लिखते हैं कि करोड़ो भारतीय 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे मनाते हैं, पर इसी दिन अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को लाहौर में फांसी की सजा सुनाई गई थी। यह बात युवा पीढ़ी व मीडिया चैनल भूल गया है। इन शहीदों को शत शत नमन।

इतना ही नहीं अगर आप सोशल मीडिया पर सर्च करेंगे तो पुराने ऐसे ढे़र सारे मैसेज आपको पढ़ने को मिल जाएंगे। आपको बतां दें ये वैलेंटाइन डे के नाम पर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। लोगों को फर्जी मैसेज भेजे जा रहे हैं। दरअसल 14 फरवरी को ना तो भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी की सजा सुनाई गई थी और ना फांसी दी गई थी।

भगत सिंह को कब हुआ फांसी का ऐलान

आपको बता दें कि एमएस गिल ने अपनी किताब “ट्रायल्स दैट चेन्ज्ड हिस्ट्रीरू फ्रॉम सोक्रेट्स टू सद्दाम हुसैन” में लिखा है, “स्पेशल ट्राइब्युनल कोर्ट ने 7 अक्तूबर 1930 को भारतीय दंड संहिता की धारा 121 और 302 और एक्सप्लोसिव सबस्टैंस ऐक्ट 1908 की धारा 4(बी) और 6(एफ) के तहत बेहद ठंडी और संजीदा आवाज में जहर उगला और भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव की मौत की सजा का एलान किया”

जुगल किशोर गुप्ता ने अपनी किताब “हिस्ट्री ऑफ सिरसा टाउन” में लिखा है कि “लाहौर षड्यंत्र मामले में 7 अक्तूबर 1930 को ट्राइब्युनल ने सजा का एलान किया। 18 फरवरी 1931 (18 February 1931) में सिरसा के लोगों ने एक बड़ी सभा का आयोजन किया, जिसमें मूल चंद कडारिया ने भगत सिंह को याद करते हुए अपनी कविता सुनाई।”

जुगल ने आगे लिखा है कि “इसके बाद हजारों की संख्या में लोगों ने एक मेमोरैंडम पर दस्तखत किया जिसे वाइसरॉय के पास भेजा जाना था। लोगों ने इसके जरिए सरकार से गुजारिश की कि भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को माफी दी जाए. लेकिन इन अपीलों का ब्रितानी सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा और इन तीनों को 23 मार्च 1931 (23 march 1931) को फांसी दे दी गई।”

14 फरवरी का ये है संबंध

आपको बता दें कि 14 फरवरी और भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेख की फांसी एक जगह जरूर है। दरअसल 14 फरवरी 1931 (14 February 1931) को पंडित मदन मोहन मालवीय ने वायसराय को टेलीग्राम किया था। उन्होंने टेलीग्राम के माध्यम से भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव के फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की अपील की थी।

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