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Formers Protest: किसानों ने सरकार के खिलाफ आखिर क्यों खोला है मोर्चा? जानिए MSP को लेकर क्या हैं उनकी चिंताएं?

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कृषि कानून (Agriculture Law) को लेकर (Farmers protest) किसानों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। किसानों में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए मंगलवार को सरकार ने किसानों को वार्ता के लिए बुलाया। हालांकि पहले ही किसान संगठन अपना रुख साफ कर चुके हैं। किसानों का कहना है कि MSP और मंडी के मुद्दे पर उन्हें लिखित गारंटी चाहिए। किसान संगठनों का कहना है कि नया कानून जैसे ही लागू होगा, उसके बाद धीरे धीरे MSP खत्म होने लगेगी। किसानों की मांग है कि डैच् हमेशा के लिए बनी रहे। किसान उसे कानून में शामिल करवाना चाहते हैं। 

किसानों के डर की ये है बड़ी वजह? 
किसान संगठनों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा लागू कानून जब असर दिखाएगा तो APMC एक्ट कमजोर होगा, जो मंडियों को ताकत देता है। साथ ही MSP की गारंटी भी खत्म होने लगेगी, जिसका सीधा नुकसान भविष्य में किसान को उठाना पडे़गा। यही वजह है कि किसान MSP को कानून का हिस्सा बनाने की मांग कर रहे हैं। 

किसानों ने इसके लिए टेलिकॉम कंपनियों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में टेलिकॉम कंपनियों (telecom Company) ने मुफ्त का डाटा (Free Data) दिया और जब लोग उसके आदि बन गए तो दाम बढ़ा दिए। ऐसा ही उनके साथ होने जा रहा है। किसानों के मुताबिके कानून लागू होने के बाद कॉरपोरेट खरीदार अधिक दाम पर फसल ले सकते हैं, लेकिन उनपर MSP का कोई दबाव नहीं होगा तो वो मनचाहा दाम लेंगे उस वक्त तब किसान के पास कोई विकल्प नहीं होगा।

मंडी को लेकर भी डर

किसानों में इस बात का भी डर है कि अगर मंडी से बाहर खुले तौर पर फसल खरीद-बेचने की छूट होगी तो मंडियां कमजोर होंगी। ऐसे में आगे चल कर उन्हें बंद करने की नौबत भी आ सकती है। किसानों के अनुसार मंडी का मजबूत होना जरूरी है, क्योंकि मौजूदा वक्त में वो अपनी जरूरत के हिसाब से आढ़तियों से पैसा ले लेते हैं, चाहे फसल आने में वक्त हो। ऐसे में किसानों को मदद होती है, लेकिन कॉर्पोरेट के साथ इस तरह के रिश्ते बनाना आसान नहीं होगा।

क्या कह रही है सरकार?
कृषि कानून को लेकर किसानों के मन में बैठे अविश्वास को लेकर केंद्र लगातार सफाई दे रहा है। किसानों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए सरकार भी लगातार किसानों को विश्वास दिला रही है यह किसानों के हित में और और MSP खत्म नहीं होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर समेत अन्य मंत्री-नेता इसपर विश्वास दिला चुके हैं, लेकिन किसान अपनी मांग को लेकर लगातार डटे हुए हैं। वो किसी भी तरह सरकार की बातों में नहीं आ रहे। किसानों का सीधा कहना है कि अगर MSP खत्म नहीं करनी है तो सरकार इसे कानून में शामिल कर दे, लेकिन सरकार उसपर राजी नहीं है। पीएम मोदी ने सोमवार को अपने संबोधन में भी कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में मंडी और MSP सिस्टम को मजबूत करने का काम हुआ है, ऐसे में वो क्यों इन्हें खत्म करेंगे।

आखिर MSP क्या है ? 
आपको बता दें कि किसानों को उनकी फसलों की लागत से ज्यादा मूल्य मिलने की गारंटी हो इसके लिए सरकार देशभर में अनाज, तिलहन, दलहन आदि की मुख्य फसलों के लिए एक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करती है। खरीदार नहीं मिलने पर सरकार अपने खरीद केंद्रों के माध्यम से MSP पर किसान से फसल खरीद लेती है। MSP निर्धारित करते वक्त कृषि पैदावार की लागत, मूल्यों में परिवर्तन, मांग-आपूर्ति जैसी कई बातों का ध्यान रखा जाता है. यही कारण है कि किसानों की चिंताएं कम होती हैं और उन्हें नुकसान नहीं उठाना होता है

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