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शहीद दिवसः महात्मा गांधी को 5 बार पहले भी मारने की हुई कोशिश, साजिश में तीन बार गोडसे रहा शामिल

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30 जनवरी 1948 (30 January 1948), इसी दिन नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse) ने दिल्ली स्थित बिडला हाउस (Delhi Birla House) में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Father of the Nation Mahatma Gandhi) को गोली मारी थी। उस वक्त 78 साल के महात्मा गांधी  (Mahatma Gandhi) के आखिरी शब्द “हे राम” थे।

वो आज ही का दिन था, यानी 30 जनवरी। जिसे अब शहीद दिवस (Martyrdom Day) के रूप में मनाया जाता है। शायद आपको मालूम ना हो कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सबसे प्रसिद्ध शख्सियत महात्मा गांधी के हत्या की कोशिश पहले ही 5 बार हो चुकी थी। मगर महात्मा गांधी अपनी जान कि परवाह किए बिना दूसरों की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंतित रहे।

मशहूर पत्रकार और सिविल राइट्स एक्टिविस्ट्स तीस्ता सीतलवाड़ द्वारा संपादित बियोंड डाउल ‘Beyond Doubt: A Dossier on Gandhi’s Assassination’ में सभी पांच हत्यांओं के बारे में दस्तोजीकरण किया गया है। आपको बता दें कि ये किताब 2015 में प्रकाशित हुई थी।

पहली बार महात्मा गांधी की हत्या का प्रयास 25 जून 1934 को किया गया

आर्काइव साक्ष्यों (Archive evidence) के अनुसार पहली बार महात्मा गांधी की हत्या का प्रयास (First attempt to assassinate Mahatma Gandhi) पुणे में किया गया। पुणे में महात्मा गांधी भाषण देने के लिए पहुंचे थे। 

उसी दौरान षणयंत्रकारियों ने एक कार में बम धमाका किया। उनके सचिव प्यारेलाल ने अपनी किताब "महात्मा गांधीः द लास्ट फेज" (Mahatma Gandhi: The Last Phase) में लिखा है कि इस साजिश के चलते निर्दोष लोगों की मौत होने पर बापू को कितना दुःख हुआ।

दूसरी बार जुलाई 1944 में हत्या की कोशिश

दूसरी बार महात्मा गांधी की हत्या का प्रयास जुलाई 1944 में महाराष्ट्र (Maharashtra)के पंचगनी में किया गया। वहां प्रदर्शनकारियों के एक समूह द्वारा लगातार उनके खिलाफ नारेबाजी कर हंगामा किया जा रहा था। महात्मा गांधी ने प्रदर्शनकारियों के नेता नाथूराम गोडसे को चर्चा के लिए बुलाया। 

नाथूराम गोडसे ने चर्चा से इंकार कर दिया। बाद में प्रार्थना सभा के दौरान गोडसे को खंजर के साथ महात्मा गांधी की तरफ दौड़ते हुए देखा गया। गोडसे की इस हरकत को वहां मौजूद मणिशंकर पुरोहित और सतारा के भिलारे गुरुजी ने धरदबोचा। कपूर आयोग के समक्ष दोनों ने इस हमले की गवाही दी।

तीसरी बार सितंबर 1944 में हत्या का प्रयास

महात्मा गांधी को तीसरी बार मारने का प्रयास सितंबर 1944 में किया गया। दरअसल हिंदू महासभा महात्मा गांधी और जिन्ना की मुलाकात के खिलाफ थे। गांधी को मुंबई सभा में जाने से रोकने के लिए नाथूराम गोडसे और एलजी थट्टे ने आश्रम को चुना। हालंाकि गोड़से ने जब महात्मा गांधी पर हमले की कोशिश की तभी आश्रम के लोगों ने उसे पकड़ लिया।

चौथी बार 1946 में हत्या का प्रयास किया गया

चौथी बार महात्मा गांधी की हत्या का प्रयास तब हुआ जब वो ट्रेन से पुणे जा रहे थे। ट्रेन पटरियों पर रखे पत्थर के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हालंाकि ड्राइवर ने अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए ज्यादा क्षति होने से बचा लिया। इस हादसे में गांधी सुरक्षित बच गए थे।

पांचवी बार 20 जनवरी 1948 को हत्या का किया प्रयास

महात्मा गांधी को पांचवी बार मारने की साजिश 20 जनवरी 1948 को बिड़ला हाउस में रची गई। गांधी को मारने के लिए नाथूराम गोडसे,मदनलाल पाहवा, विष्णु करकरे, नारायण अप्टे,दिगंबर बैज, गोपाल गोडसे और शंकर किस्तैया ने बैठक में भाग लेने की योजना बनाई थी। ये लोग मंच पर बम और गोली चलाने वाले थे। हालांकि इस योजना पर अमल नहीं लाया जा सका क्योंकि साजिश में शामिल मदनलाल पाहवा को पकड़ लिया गया था।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                      

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