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MDH कम्पनी मालिक धर्मपाल गुलाटी पाकिस्तान से भारत 15 सौ रुपये लेकर आये थे, तांगा चलाया, आज है 5400 करोड़ की सम्पत्ति

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मसाला किंग के नाम से देश दुनिया में नाम कमा चुके महाशिया दी हट्टी (MDH) के मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी (Dharamapal Gulati) का 3 दिसम्बर की सुबह 5.38 बजे दिल्ली स्थित माता चंदन देवी अस्पताल (Mata Chandan Devi Hospital) में निधन हो गया। वह 98 साल के थे।

गुलाटी का जन्म पाकिस्तान के सियालकोट में 12 मार्च 1923 को हुआ था। उन्होंने 5वीं तक ही पढ़ाई की और 1933 में स्कूल जाना छोड़ दिया। 1937 में पिता की मदद से व्यापार शुरू किया। उन्होंने साबुन, कपड़ा, हार्डवेयर के क्षेत्र में भी हाथ आजमाया।

1947 में जब देश का विभाजन हुआ तो धर्मपाल गुलाटी 1500 रुपये लेकर पाकिस्तान से भारत आ गए। यहां उन्होंने अपने परिवार का पेट पालने के लिए तांगा भी चलाया। इसके बाद दिल्ली स्थित करोल बाग के अजमल खां रोड पर मसाले की एक दुकान खोली। उनके व्यापार में घर के लोगों का पूरा सहयोग मिला।

आईआईएफएल (IIFL) हुरून रिच 2020 की सूची शामिल

1500 रुपये ले कर भारत आये धर्मपाल गुलाटी के मसालों का व्यापार आज देश में ही नहीं विदेशों तक फैला हुआ है। आज धर्मपाल की सम्पत्ति 5400 रुपये पहुंच चुकी है। IIFL हुरून इंडिया रिच 2020 की सूची में भी भारत के सबसे बुजुर्ग अमीर शख्स थे।

100 से ज्यादा देशों तक व्यापार

आपको बता दें कि भारत में आने के बाद गुलाटी का मसालों का व्यापार धीरे धीरे बढ़ता चला गया। गुलाटी ने पहली फैक्ट्री दिल्ली के कीर्ति नगर में लगाई थी। देश और दुबई में उनकी 18 मसालों की फैक्ट्री है। लंदन में भी आफिस है। 100 से ज्यादा देशों तक मसालों का व्यापार फैला हुआ है।

पद्मविभूषण से हो चुके हैं सम्मानित

धर्मपाल गुलाटी (Dharampal Gulati) को व्यापार और उद्योग खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में काफी बेहतरीन काम करते हुए अपनी लोकप्रियता हासिल की थी। व्यापार और उद्योग खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में शानदार योगदान के लिये ही पिछले साल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) ने सम्मानित किया था। साथ ही कई अन्य जगहों पर भी सम्मानित किया गया था।

सैलरी का 90% करते थे दान

यूरोमॉनिटर के अनुसार धर्मपाल गुलाटी FMCG सेक्टर के सबसे ज्यादा कमाई वाले CEO थे। बहुत कम ही लोग जानते हैं कि गुलाटी अपनी सैलरी का 90% हिस्सा दान कर देते थे। गुलाटी 20 स्कूल औए एक हॉस्पिटल का भी संचालन कर रहे थे। उन्होंने व्यापार के क्षेत्र में अपने दम पर अपनी पहचान बनाया था।

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