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राष्ट्रीय सम्पत्ति बेचने के सवाल पर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा ‘सरकार चला नहीं पा रही तो रखने से क्या फायदा”

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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Finance minister Nirmala Shitaraman) ने सोमवार को संसद में आम बजट (Budget 2021) पेश कर दिया। कोरोना काल (Corona period) में यह देश का पहला बजट था। ऐसे में लोगों को बजट से बहुत ज्यादा मिलने की उम्मीद भी नहीं थी और हुआ भी कुछ ऐसा ही। टीवी डिबेट पर दिनभर बहस छिड़ी रही।

देश नहीं बिकने दूंगा कहने वाले पूरे देश की इज्जत नीलाम करने में लगे हैं। लाल किले (Redford) का ठेका प्राइवेट हाथो में देने वालों को अब लाल किले में अपनी शान नजर आने लगी है और किसान तुर्क लुटेरे। एक ओर बजट पेश हो रहा था दूसरी ओर टीवी पर आरोप प्रत्यारोप की पंचायत सजी थी।

सत्ता पक्ष को बजट राम राज्य स्थापित करने वाला लग रहा था। विपक्ष लूटेरा बताने मंे जुटा हुआ था। दरअसल बजट को लेकर देश की जनता के कान उस समय खड़े हो गए जब वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने राष्ट्रीय सम्पत्ति बेचने की बात कही गई।

फिर क्या चौक चौराहों से लेकर सोशल मीडिया ( Social Media) तक, सभी जगह राष्ट्रीय सम्पत्ति (National Property) बेचने को लेकर बहस छिड़ गई है। आखिरकार इंडिया टीवी पर आज की बात कार्यक्रम में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इस पर सफाई देकर मुद्दे को और गर्म कर दिया है।

दरअसल एंकर रजत शर्मा ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से जब पूछा कि बजट में राष्ट्रीय सम्पत्ति बेचने की बात कही गई है। जवाब में निर्मला सीतारमण ने कहा कि जब सरकार चला नहीं पा रही तो उसे रखने में क्या फायदा है। उन्होंने आगे कहा कि नेशनल एसेट्स पब्लिक मनी लगातार जब उसमें से कुछ नहीं निकल रहा, ऊपर से लाॅस में चल रहा है तो कितने साल तक आप पब्लिक टैक्स पेयर पैसों को लगातार कुंए में डालते जाएंगे।

साथ ही उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि उसको एक भारतीय सिटिजन या ज्वाइंट वेंचर कंपनी को या देश के किसी आॅपरेटर को सेल करके उसे चालू रखने में इकोनाॅमी का फायदा है कि बंद करने से इकोनाॅमी का फायदा है। और उसको अगर कोई चलाने लायक लोग लेते हैं, चलाते हैं प्रोफेशनली, उससे फायदा है कि आइडल करने में फायदा है।

नुकसानदायक चलाने वाले से सरकार ने जहां उनका स्पेशलिज्म नहीं है। उनके हाथ में रखना फायदेमंद है। इसको भी सोचना चाहिए। एयर इंडिया का बहुत क्लासिक उदाहरण है। इसके बाद एंकर रजत शर्मा ने कहा कि ये आपने ठीक कहा कि जो ऐसे एसेट्स है जो फायदा नहीं दे रहे हैं, उनको बेचना है लेकिन डिसइन्वेस्टमेंट का वादा कर आपने एयर इंडिया का नाम लिया।

पिछले बजट में भी आपने जिक्र किया था, कुछ हुआ नहीं। जवाब में वित्तमंत्री ने कहा कि हुआ नहीं मैं मानती हूं। इसलिए हुआ नहीं कि जुलाई 19 बजट के बाद धीरे-धीरे इकाॅनमी स्लो होने लगी, डिमांड कम होने लगी। लिक्विडिटी का शार्टेज था। इसको हम सही करके अक्टूबर में जिला-जिला जाकर बैंक के द्वारा लोन के्रडिट एक्सटेंशन करने के हमारे एफर्टस कर रहे थे।

उस समय हमारे पाॅकेट में जाकर एयरलाइन जैसे एसेट्स को सेल करना उतना आसान नहीं था। जितना पैसा मिल रहा है, उतना ही सेल करो, डेसपरेशन में सेल करो, टैक्स पेयर का पैसा है। उसमें पार्लमेंट में जिम्मेदार होकर बोलना कि जितना पैसा आया, हमने ले लिया। यह तो नहीं बोल सकते हैं। सही समय, मार्केट और अच्छा पैसा मिलने का जब पाॅसिबिलिटी है तब सेल करेंगे।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का ये बयान कि जब सरकार चला नहीं पा रही तो उसे रखने में क्या फायदा है। अब सवाल ये है कि अगर आप देश की राष्ट्रीय सम्पत्ति को संभाल नहीं सकतीं तो देश की जनता ने आपको राष्ट्रीय सम्पत्ति को नीलाम करने के लिए नहीं चुना है।

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