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प्रधानमंत्री मोदी कभी थे आडवाणी के राम मंदिर रथ यात्रा में समन्वय, सोनिया ने बताया था “मौत का सौदागर”, जानिए मंदिर अभियान के साथ कैसे बढ़ा पीएम नरेंद्र मोदी का कद

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अयोध्या में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन कर रहे हैं। पहली बार ऐसा हो रहा है कि देश का कोई प्रधानमंत्री भगवान राम के जन्मस्थान तक गया है। हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी भी अयोध्या गए लेकिन भगवान राम के जन्मस्थान तक नहीं गए।

नरेंद्र मोदी भी प्रधानमंत्री बनने से पहले तक अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा जरूर उठाते रहे लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद राम मंदिर निर्माण के मुद्दे से वो भी बचते नजर आए। हालांकि अयोध्या में राम मंदिर मामले पर पीएम मोदी का सबसे बड़ा बयान सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आया। पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में जो कहा वह लोगों के दिलो दिमाग पर छा गया।


1989 के चुनाव की देन है राम मंदिर का मुद्दा

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हत्या के बाद 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को जनता का पूरा समर्थन मिला। कांग्रेस ने रिकार्ड 401 सीटों पर प्रचंड बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया था। चुनाव 542 सीटों पर हुआ था। इस चुनाव में बीजेपी को महज 2 सीटें ही मिली थी। इस करारी हार के बाद बीजेपी को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान देने के लिए राम मंदिर मुद्दे को उठाना पड़ा था।

हालांकि आरएसएस सहित देश के कई अन्य संगठन पहले से ही बाबरी मस्जिद की जगह राम मंदिर निर्माण का मुद्दा उठा रहे थे। 1989 में लोकसभा चुनाव हुए। बीजेपी राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को जनता के बीच भावनात्मक रूप से उठाने में सफल रही। नतीजा चुनाव में 89 सीटों पर जीत मिली। पांच सालों में इतनी बड़ी बढ़त के साथ बीजेपी के हाथ राम नाम का जादुई मंत्र लग गया। बीजेपी ने राम नाम को अपना सियासी हथियार बनाया।


आडवाणी ने शुरू किया राम मंदिर निर्माण का अभियान

1989 लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी के हाथ राम मंदिर निर्माण का मुद्दा मिल गया। तत्कालीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे लालकृष्ण आडवाणी ने चुनाव में अच्छी बढ़त पाने के लिए राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को पूरे देश में जोर शोर से उठाने की योजना बनाई। उन्होंने राम मंदिर निर्माण रथ यात्रा की शुरुआत की। उस दौरान नरेंद्र मोदी पार्टी के राष्ट्रीय चुनाव समिति के सदस्य थे।

25 सितंबर 1990 को लालकृष्ण आडवाणी ने रथ यात्रा निकाली। यह रथ यात्रा गुजरात के सोमनाथ से मुंबई के लिए शुरू हुई। नरेद्र मोदी उस रथ यात्रा के समन्वय की जिम्मेदारी निभा रहे थे। उस दौरान मोदी ने यह कल्पना भी नहीं की होगी कि आज जिस रथ यात्रा का सामान्य सा कार्यकर्ता हूं। भविष्य में उस रथ यात्रा के संकल्प की बुनियाद में पहला पत्थर मेरा होगा।

गुजरात दंगे के बाद मुख्यमंत्री पद पर आया था संकट, आडवानी आए थे बचाव में


2002 का गुजरात दंगा भला कैसे भूला जा सकता है। नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने ही थे कि अयोध्या से आ रही कारसेवकों से भरी ट्रेन को आग के हवाले कर दिया गया। इस हमले में 59 लोग जिंदा जलकर मर गए। इस घटना के बाद पूरा गुजरात जैसे जल उठा हो। जगह-जगह दंगे शुरू हो गए।

हालांकि नरेंद्र मोदी लगातार ये दावा करते आएं हैं कि उन्होंने उस दंगे को रोकने का पूरा प्रयास किया था। बावजूद इसके गुजरात दंगे का कलंक से आज भी उनका पीछा नहीं छोड़ रहा। कहीं ना कहीं किसी रूप में यक्ष प्रश्न के साथ सामने आ ही जाता है। उस दंगे के बाद 2007 के चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नरेंद्र मोदी को “मौत का सौदागर” तक कह दिया था। आलोचक उन पर आरोप लगाते रहे कि उन्होंने मुस्लिमों के साथ भेदभाव की नीति अपनाई।

गुजरात दंगे के बाद नरेंद्र मोदी की पूरे देश में आलोचना हुई। उस दौरान बीजेपी नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने खुद नरेंद्र मोदी की आलोचना की थी। उन्होंने मोदी को इस घटना के बाद सीएम पद से हटा दिए जाने तक की बात कह डाली थी लेकिन लालकृष्णआडवाणी नरेंद्र मोदी के बचाव में आ गए थे।

गुजरात दंगे के बाद नरेंद्र मोदी की छवि पूरे देश में हिन्दूवादी नेता के रूप में बन कर उभरी। इसके बाद मोदी भी हिंदुत्व की राह पर चल दिए। हालांकि उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान हिंदुत्व के बजाव विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ा। लोकसभा चुनाव में शानदार जीत के साथ नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में जनता के सामने आए।  


सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी ने राम मंदिर मुद्दे पर मुखर होकर कर जब बोला


नरेंद्र मोदी भले ही प्रधानमंत्री बनने के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के नाम पर बोलने से बचते रहे हों लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला अयोध्या राम मंदिर निर्माण के पक्ष में आया। उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम जो संबोधन दिया लोगों के जेहन में उतर गया।।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा की “आज 9 नवंबर है, इसी दिन जर्मनी में बर्लिन की दीवार ढहाई गई थी। आज ही करतारपुर काॅरिडोर का भी उद्घाटन हुआ और अब अयोध्या पर फैसला आया है। यह तारीख हमें हमेशा एकजुट रह कर आगे बढ़ने का संदेश देती रहेगी। यह फैसला एक नई सुबह लेकर आया है। अब अगली पीढ़ियां नए भारत का निर्माण करेंगी। आज का दिन कड़वाहटों को भुलाने का दिन है। नए भारत में डर, कड़वाहट और नकारात्मकता की कोई जगह नही है।” राष्ट्र के नाम पीएम मोदी का यह संबोधन लोगों के जैसे दिल मे उतर गया।

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