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रिपोर्ट: दिल्ली हिंसा में पुलिस ने महिलाओं के कपडे़ फाड़ने का किया प्रयास, नाजुक अंगों पर मारे जूते, महिलाओं और पुरुषों के प्राइवेट पार्ट पर आईं गंभीर चोटें

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नागरिकता संसोधन कानून यानी Citizenship Amendment Act (CAA) को लेकर फरवरी में दिल्ली की सड़कों पर जगह जगह हिंसा हुई थी। उस हिंसा के दौरान दिल्ली पुलिस 15 महिलाएं और 30 पुरुष का शोषण किया।

दिल्ली हिंसा में कई लोगों की जान भी गई थी। यह दावा National Federation of Indian Women (NFIW) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में किया गया है। NFIW की रिपोर्ट में शामिल किए गए तथ्यों का आधार घटना के साक्ष्य, हिंसा में घायल लोगों के बयान और घायलों का इलाज करने वाले डाॅक्टरों और नर्सों के बयान हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंसा के दौरान महिलाओं और अन्य लोगों को टारगेट करके उनका यौन शोषण किया गया। उस दौरान 15 से 60 साल के करीब 70 लोग को हिंसा की प्रताड़ना का दंश झेलना पड़ा। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हिंसा के दौरान पुरुष पुलिसकर्मियों के द्वारा महिलाओं के कपड़े फाड़ने का प्रयास किया गया। उनके साथ छेड़खानी हुई।

महिलाओं के नाजुक अंगों पर पुलिस के द्वारा जूतों से मारा गया। उनका कई अन्य तरह से भी यौन शोषण किया गया। इसके अलावा पुरुषों के भी प्राइवेट पार्ट पर भी मारा गया। रिपोर्ट के अनुसार पुलिस की इस करतूत के कारण महिला और पुरुष के प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोटें भी आईं।

हालांकि दिल्ली पुलिस की ओर से महिलाओं और पुरुषों के द्वारा किसी भी प्रकार से इस प्रकार के कृत्य से इंकार किया गया है। साथ ही कहा कि उस दौरान पुलिस की कोशिश हिंसा को रोकना था। NFIW के इस दावे के बाद अभी तक दिल्ली पुलिस की ओर से कुछ भी बयान नहीं आया है। वहीं इस दावे के बाद दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठने लगा है।

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