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इलाहाबाद

“गो ग्रीन पहल” पर रेलवे ने किसी कमर, रेलवे स्टेशनों के पास 185 एकड़ खाली भूमि चिन्हित, 201 एकड़ भूमि को मंजूरी का इंतजार

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उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) ने “गो ग्रीन पहल” के अन्तर्गत अपनी सर्विस बिल्डिंगों, प्लेटफॉर्म शेडों, कार्यशालाओं और अन्य इमारतों की छतों पर सोलर पाॅवर प्लांट स्थापित कर रेन्यूएबल ऊर्जा के उपयोग को निरंतर बढ़ाया है। एनसीआर के विभिन्न कार्यालय सहित अन्य इमारतों की छतों पर 11 मेगावॉट से अधिक के सोलर पाॅवर प्लांट स्थापित किया जा चुका है।

सीपीआरओ अजीत कुमार सिंह ने बताया कि 2019-20 में लगभग 5 करोड़ की लागत से 85.55 लाख यूनिट विद्युत ऊर्जा का उत्पादन किया गया है। सौर ऊर्जा के प्रयोग से सालाना 7011 टन कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में भी कमी आई है। कुल स्थापित क्षमता में 3.845 मेगावॉट सौर पैनल प्रयागराज में, 1.2 मेगावॉट सौर पैनल झांसी में और 1.5 मेगावॉट सौर पैनल आगरा मंडल में स्थापित किए गए है। वहीं 4.1 मेगावॉट और 0.5 मेगावॉट क्षमता के सौर संयंत्र क्रमशः झांसी कार्यशाला और रेल स्प्रिंग कारखाना सिथौली, ग्वालियर में स्थापित किए गए हैं।

उत्तर मध्य रेलवे के विभिन्न भवनों की छ्तों पर 1.86 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सौर संयंत्र की स्थापना की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही एनसीआर अब सौर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता को बढाने के लिए बडा फैसला लिया है। इसके अंतर्गत एनसीआर रेलवे की खाली भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना करेगा।

एनसीआर की ओर से विभिन्न स्टेशनों के पास 185 एकड़ खाली भूमि पहले ही चिन्हित कर ली गई है।  इसके लिए मंजूरी भी मिल गई है। वहीं रेलवे के ट्रैक्शन सब-स्टेशनों के निकट 201 एकड़ भूमि की मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है। 4 एकड़ भूमि पर 1MWp बिजली उत्पादन के सामान्य गणना के साथ एनसीआर भविष्य में लगभग 100 मेगावॉट अतिरिक्त सौर ऊर्जा के उत्पादन में सक्षम होगा।

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