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Rajsthan Politics: सियासी मैदान में सचिन पायलट नहीं बन पाए ज्योतिरादित्य सिंधिया, ये है खास वजह

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सचिन पायलट के लगातार बागी तेवर को देखते हुए आखिरकार कांग्रेस ने कडा रूख अख्तियार कर उन्हें उपमुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया। पायलट के खिलाफ कांग्रेस के इस कड़े रूख से राजस्थान के सियासी गलियारे में हलचल तेज हो गई है। सचिन पायलट को उम्मीद थी कि वो राजस्थान की राजनीति में मध्य प्रदेश के ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसा कमाल दिखा पाएंगे। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की माने तो सचिन पायलट मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य की तरह कांग्रेस की सरकार गिरा कर बीजेपी को लाने की तैयारी में थे, लेकिन पार्टी के खिलाफ उनकी ये रणनीति फेल हो गयी। वो मध्य प्रदेश के ज्योतिरादित्य की तरह सरकार गिराने में असफल रहे। दरअसर सचिन पायलट गहलोत सरकार के खिलाफ लगातार हमले बोल रहे थे। उनके बगावती तेवर को देखते हुए पार्टी आलाकमान ने भी कई बार उनसे बात की, लेकिन वो कोई भी समझौता करने को तैयार नहीं थे। यही कारण है कि लगातार दूसरे दिन भी विधायक दल की बैठक में वो शामिल नहीं हुए। इसके बाद पार्टी ने पायलट के खिलाफ अपना फरमान सुनाया। पायलट के साथ उनके गुट के तीन और लोगों पर भी गाज गिरी। उपमुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष का पद छिनने के साथ अब यह कयास लगाया जा रहा है कि सचिन पायलट बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। क्योंकि सचिन पायलट के लिए एक पार्टी को खडा करना आसान नहीं है। अब सब की निगाहें पायलट पर टिकी हैं।


सचिन पायलट इसलिए नहीं बन पाए ज्योतिरादित्य


सचिन पायलट की तरह ही ज्योतिरादित्य कांग्रेस पार्टी से नाराज थे। कुछ महीने पहले कांग्रेस पार्टी में उपेक्षा के चलते ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस को छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया था। उनके पार्टी बदलते ही मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिर गई और बीजेपी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन से अपनी सरकार बना ली। ज्योतिरादित्य जैसी शख्सियत की गिनती कांग्रेस के टाॅप 10 चेहरों के साथ राहुल गांधी के सबसे करीबियों में गिनती होती थी। उन्हें काफी कुछ विरासत में मिली थी। इसमें से एक है ज्योतिरादित्य को पिता से विरासत में मिली कट्टर समर्थकों की टीम। उनके प्रति इतना लगाव कि 22 विधायकों ने अपना भविष्य दांव पर लगा दिया। उनकी दादी जनसंघ और और भाजपा की संस्थापक सदस्य रही हैं। जिस समय ज्योतिरादित्य ने कांग्रेस के खिलाफ बिगुल बजाया उस समय कांग्रेस के पास 115 और बीजेपी के पास 107 विधायक थे। दोनों पार्टियों के बीच महज 8 सीटों का अंदर था। मध्य प्रदेश में लोगों के अंदर सिंधिया परिवार के प्रति काफी आदर है। लोग यहां पार्टी नहीं सिंधिया घराने के नाम पर वोट देने निकलते हैं। ये सब सचिन पायलट के साथ नहीं था।

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