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उत्तरप्रदेश

भारत में पहली बार किसी महिला को होगी फांसी, शबनम ने कुल्हाडी से माता-पिता, दो भाई, भाभी, बहन और भतीजे को काट दिया था

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आजाद देश के इतिहास में (First time in the history of India) फांसी की सजा के मामले में जो आज तक नहीं हुआ। वह अब होने जा रहा है। देश में पहली बार किसी महिला को फांसी ( woman was hanged) होने जा रही है। फिलहाल अभी फांसी की तारीख तय नहीं हुई है।

इसके पहले 22 साल पूर्व हत्या के जुर्म में बुंदेलखंड की महिला राजश्री (woman Rajshree of Bundelkhand) को भी फांसी देने की तैयारी की गई थी। उस दौरान सामाजिक संगठनों की मांग पर राष्ट्रपति ने राजश्री की फांसी को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। वहीं अब मथुरा जेल में दूसरी बार किसी महिला को फांसी देने की तैयारी चल रही है। मेरठ का पवन जल्लाद उस फांसी घर का मुआयना कर चुका है जहां फांसी देनी है। 

खूनी खेल ने पहुंचाया फांसी के फंदे तक

स्वतंत्र भारत के इतिहास में जिस महिला को फांसी होने जा रही है। उसका नाम शबनम है। वह अमरोहा की रहने वाली है। शबनम ने 14-15 अप्रैल 2008 की मध्यरात्रि में अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने ही घर में खूनी खेल खेला था।

शबनम ने अपने माता-पिता, दो भाई, एक भाभी, मौसी की लड़की और मासूम भतीजे को कुल्हाड़ी से काटकर बेरहमी से हत्या की थी। इस घटना को जिसने भी सुना उसकी रूह कांप गई। रूह कंपा देने वाले इस जुर्म के लिए कोर्ट ने शबनम को फांसी की सजा सुनाई थी।

मामला सुप्रीम कोर्ट गया। सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी फांसी की सजा को बरकरार रखा। इसके बाद शबनम की दया याचिका राष्ट्रपति के पास पहुंची। राष्ट्रपति ने उस याचिका को ठुकरा दिया।

आपको बता दें कि 28 वर्षीय शबनम का एक 12 वर्ष का बेटा भी है। शबनम ने जेल में ही बेटे को जन्मा है। जिस समय शबनम ने 7 लोगों की हत्या की थी। उस वक्त शबनम गर्भवती थी। सात साल तक बेटे की परवरिश जेल में ही हुई। वर्तमान में वह एक व्यक्ति की देखरेख में है।

रामपुर की जेल में बंद शबनम को फांसी के लिए मथुरा लाया जाना है। हालांकि अभी शबनम की फांसी की तारीख तय नहीं हुई है। शबनम के लिए जेल प्रशासन फांसी घर को तैयार करने में लगा है।

मथुरा जेल में इसलिए दी जा रही है फांसी

उत्तरप्रदेश में सिर्फ मथुरा जेल में ही फांसी देने की व्यवस्था है। यह व्यवस्था ब्रिटिशकाल से चली आ रही है। अंग्रेजों ने करीब 150 साल पहले मथुरा जेल में महिलाओं को फांसी देने के लिए फांसीघर बनाया था। फांसीघर का निर्माण 1870 में हुआ था। 

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