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बच्ची ने ऊंची जाति के बगीचे से तोड़ा फूल तो दबंगों ने दलितों का किया हुक्कापानी बंद, सरकारी स्कूल से लेकर दुकान तक दलितों के लिए बंद

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दलित उत्पीड़न को रोकने को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें भले ही तरह तरह के दावें करें लेकिन ओडिशा में दलितों के साथ हो रहा दुर्व्यवहार सारे दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।

ओडिशा के ढेनकनाल जिले के कांटियो केटनी गांव में एक ऐसा ही दलित उत्पीड़न का मामला सामने आया है। गांव की 15 साल की दलित बच्ची ने ऊंची जाति के बगीचे से फूल तोड़ लिए थे।

फूल तोड़ने पर ऊंची जाति के दबंगों ने 40 दलित परिवारों का हुक्कापानी बंद करने का फरमान जारी कर दिया। लड़की के पिता ने माफी भी मांगी, बावजूद इसके ऊंची जाति के लोगों ने उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया।

गांव में दलितों से बात करने पर पाबंदी लगी है। किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने पर भी रोक लगा दी गई है। आपको बता दें कि गांव में करीब 800 परिवार हैं, जिनमें से 40 परिवार दलित हैं।

दलितों ने 17 अगस्त को ज्ञापन के माध्यम से संबंधित मामले की शिकायत जिला प्रशासन और स्थानीय थाने में की है। ज्ञापन में कहा गया है कि गांव में हमें काम नहीं दिया जा रहा है।

इसके कारण हमें दूसरे गांव काम की तलाश में जाना पड़ रहा है। समुदाय के ज्यादातर लोग अर्धसाक्षर या अनपढ़ हैं। समुदाय कर लोग गांव में ही दूसरों की खेती करके जीवनयापन करते हैं।

दलितों को शादियों और अंतिम संस्कार के लिए भी सड़कों पर भीड़ जमा करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि दलित परिवार के बच्चे सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ सकते।

साथ ही सरकारी स्कूल में जो दलित शिक्षक हैं उन्हें अपना तबादला कराने का भी फरमान जारी किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सरपंच ने दो समुदायों के बीच मसले को जल्द ही आपसी सहमति से सुलझाने की बात कही है।

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