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राजनीति

Bihar Assembly Elections 2020: बीजेपी के साथ गठबंधन से नीतीश की JDU को लग सकता है बड़ा झटका, ये है बड़ी वजह

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Bihar Assembly Elections 2020:      इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार को भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन करना भारी पड़ सकता है। पिछले विधानसभा चुनाव ने भले ही नीतीश बीजेपी के सहारे बिहार की सत्ता पाने में सफल रहे लेकिन इस बार गठबंधन के सहारे सत्ता पाना टेंढी खीर साबित हो सकता है। माना जा रहा है कि इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियां बीजेपी की राह में रोड़े बन सकती हैं।

दरअसल यूपी और बिहार दोनों पड़ोसी राज्य हैं। यूपी में बीजेपी की योगी आदित्यनाथ वाली सरकार है जबकि बिहार में जेडीयू और बीजेपी गठबंधन वाली सरकार। दोनों पड़ोसी राज्य का एक दूसरे पर ना केवल सामाजिक बल्कि राजनीति दखल भी देखने को मिलता रहा है। शिक्षा, बेरोजगारी, गरीबी और भुखमरी दोनों राज्यों की मूलभूत समस्या रही हैं। 

बेरोजगारी की मार झेल रहे युवाओं को केंद्र सरकार पहले ही ठेंगा दिखा चुकी है। वहीं उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री मंत्री योगी आदित्यनाथ सरकारी नौकरी की आयु सीमा, सरकारी नौकरी से पहले 5 साल संविदा, दो बच्चे से ज्यादा वालों के चुनाव लड़ने पर पाबंदी, यूपी में विशेष पुलिस बल के गठन, 50 से ज्यादा उम्र वाले पुलिसकर्मियों के रिटायमेंट सहित अन्य नीतियों के कारण जनता के बीच घिरते नजर आ रही है।

इसके पहले भी योगी सरकार की कई नीतियों को लेकर जनता में काफी नाराजगी है। बीजेपी शासित राज्यों में खराब नीतियों के कारण बीजेपी लगातार विपक्ष के निशाने पर रही है। बिहार के विभिन्न जिलों के युवा यूपी के प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, लखनऊ सहित जिलों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

साथ ही एक बड़ा तबका यहां रोजगार की तलाश में आता है। यूपी में शिक्षक, सरकारी नौकरी, प्राइवेट नौकरीपेशा से लेकर व्यापारी वर्ग तक दरकार की नीतियों का शिकार महसूस कर रहा है। माना जा रहा है कि बिहार के युवाओं और जनता में बीजेपी की नीतियों को लेकर काफी आक्रोश है।

लोगों को डर है कि अगर इस बार बिहार में नीतीश के जेडीयू और बीजेपी के गठबंधन की सरकार बनी तो उन्हें भी बीजेपी की थोपी गई नीतियों का शिकार होना पड़ेगा। क्योंकि बीजेपी गठबंधन के कारण केंद्र की नीतियों पर चलना नीतीश कुमार की मजबूती होगी।

जनता में सरकार के खिलाफ है जबरदस्त आक्रोश

बिहार में बाढ़ प्रभावित जनता में नीतीश की गठबंधन सरकार को लेकर जबरदस्त आक्रोश है। यही वजह है कि बिहार में बाढ़ की मार झेल रही जनता के बीच पहुंचे बीजेपी सांसद और उनके समर्थकों को लोगों ने दौड़ा लिया। जनता और बीजेपी समर्थकों के बीच जमकर जूते, चप्पल और कुर्सियां चलीं। वहां की जनता ने उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर कुर्सी, जूते और चप्पलों से पीटा। अब बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक है। बीजेपी और जेडीयू गठबंधन एक बार फिर अपने चुनावी मुद्दों के साथ प्रचार मैदान में जुट गई है। बीजेपी के कारण बिहार में नीतीश की राह आसान नजर नहीं मानी जा रही है, क्योंकि बीजेपी के खिलाफ जनता का आक्रोश बिहार चुनाव को नई दिशा दे सकता है।

हालांकि अगर नीतीश चुनाव में बड़ी जीत भी हासिल भी कर लेते हैं तो भी उन्हें सरकार बनाने के लिए बीजेपी के आंकड़ों की जरूरत पड़ सकती है। वहीं अगर चुनाव में बीजेपी का जादू नहीं चला तो गठबंधन पर बिहार का बाढ़ प्रभावी दिखेगा।

बीजेपी के लिए बेरोजगारी, निजीकरण सहित अन्य मुद्दे बड़ी चुनौती

केंद्र में बीजेपी की सरकार है। साथ ही देश के कई राज्यों में बीजेपी की सत्ता है। यूपी और बिहार में सर्वाधिक बेरोजगार युवा हैं। इन राज्यों का एक बड़ा वर्ग दूसरों राज्यों की मजदूरी पर निर्भर है। सरकार की गलत नीतियों ने कोरोनाकाल के लाॅकडाउन में लाखों मजदूरों, प्राइवेट नौकरीपेशा और व्यापारियों को सड़क पर ला दिया।

सैंकड़ों मील नंगे पांव पैदल चलते हुए जाने कितनी जानें घर की दहलीज पर पांव रखने से पहले ही दम तोड़ती दिखीं। जाने कितने मासूमों की जान पिता के कंधों पर ही भूखे प्यासे रास्ते में ही चली गयी। केंद्र सरकार की व्यवस्था की मार अब भी लोग झेल रहे हैं। केंद्र की नौकरी पर सरकार ने रोक लगा दी है।

बीजेपी शासित राज्यों में भी ऐसे ही हालात हैं। सरकार ने सरकारी संस्थाओं का निजीकरण कर नौकरी का सपना देखने वाले युवाओं को भी बड़ा झटका दिया है। युवा और किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर बिहार की जनता में काफी नाराज है।


बीजेपी के खिलाफ हैं ये मुद्दे

– 16 जोन में रेलवे खत्म करेगा 11040 पद
– रेलवे की आधी नियुक्तियां खत्म करने का आदेश
– दक्षिण पूर्व रेलवे में 3681 पद होंगे खत्म
– रेलवे का निजीकरण
– सरकारी बैंक और बीमा कंपनियों को बेचने की तैयारी
– बैंको का निजीकरण
– 2018 में नोटबंदी के बाद 1.10 करोड़ लोगों ने गंवायी नौकरी
– सबसे ज्यादा नौकरी छिनने वाले प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी
– 4 करोड़ लोग बेरोजगार
– मोदी सरकार में अर्थव्यवस्था सबसे निचले पायदान पर

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