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कभी जुर्म की दुनिया में इस भारतीय खिलाड़ी की बोलती थी तूती, वर्ल्ड कप में कर चुका है कप्तानी, जानिए कैसे बदली जिंदगी

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भारतीय टीम का एक ऐसा खिलाड़ी भी है जिसके नाम पर कभी लोग थर्राते थे। जुर्म की दुनिया में उसकी तूती बोलती थी। उसके लिए मारपीट करना, छीनना, डराना, किसी के ऊपर बोरा डालना सहित अन्य क्राइम करना आम बात थी। एक दिन उसकी जिंदगी में कुछ ऐसा हुआ कि उसकी पूरी जिंदगी बदल गई। आज भारतीय फुटबाॅल की दुनिया में उसका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।  

उस खिलाड़ी का नाम है अभिषेक पाॅल। उन्होंने ब्राजील में खेले गए स्लम साॅकर वर्ल्ड कप में इंडिया टीम के लिए कप्तानी भी की थी। एक समय ऐसा भी था कि अभिषेक का कभी दूर दूर तक खेल से नाता ही नहीं था। इस फुटबाॅल खिलाड़ी ने जब आमिर खान के टीवी शो “सत्यमेव जयते” में अपनी कहानी बयां की तो लोग भी उनकी जिंदगी से रूबरू हो कर ताज्जुब में पड़ गए। 

उन्होंने आमिर खान के टीवी शो सत्यमेंव जयते कार्यक्रम में अपनी दर्दभरी कहानी बताते हुए कहा कि “फुटबाॅल ने उनकी जिंदगी बदल कर रख दी। उन्हें ये नई पहचान देने वाले स्लम साॅकर के संस्थापक प्रोफेसर विजय बारसे हैं।” उन्होंने आमिर खान को बताया कि “बचपन से उनका सपना भाई बनने का था। किसी को मारना-पीटना, छीना झपटी, हपका देना (डराना) आम बात थी।”

अभिषेक ने आमिर को बताया कि “सर जिस एरिया में मैं रहता था, वहां एक काॅलेज था। वहां एक प्रोफेसर थे विजय बारसे। काॅलेज के अपोजिट में हमारा अड्डा था। प्रोफेसर हमको रोज देखते थे। एक दिन उन्होंने हम लोगों को बुलाया। हम लोग जब पहुंचे तो उन्होंने पूछा फुटबाॅल खेंलेंगे आप लोग? इस पर मैने पूछा कितने पैसे मिलेंगे? उन्होंने कहा कि हर किसी को 5-5 रुपये। उस समय मैं 14-15 साल का था।”

उन्होंने आमिर खान को आगे बताते हुए कहा कि “यह सिलसिला कुछ दिन चला। फिर उन्होंने पैसे देना बंद कर दिया। बावजूद इसके हमारा फुटबाॅल खेलना जारी रहा। कुछ दिन बाद उन्होंने फुटबाॅल देना भी बंद कर दिया। लेकिन हमारा खेलना बंद नहीं हुआ। दरअसल हमें फुटबाॅल खेलने का नशा हो चुका था। हालांकि उस समय हमें इसका आभास नहीं हुआ। 
अभिषेक ने कार्यक्रम में बताया कि उस दौरान मेरा क्राइम रेट काफी तेजी से बढ़ रहा था।

मैं एक बार किसी की प्राॅपर्टी पर कब्जा करने जा रहा था। तभी विरोधी गैंग के गुंडो ने मुझे घेर लिया। मैं भागा और भागता ही गया। मैं ऐसी स्थिति में फंस चुका था कि मैं कहीं पर भी नहीं जा सकता था। पुलिस मुझे ढूंढ रही थी। गुंडे मेरी जान के प्यासे थे। मैं कब्रिस्तान में जा कर छिप गया। लोगों के जूठन तक खाने लगा।

उस दौरान किसी ने मुझे वकील की सलाह दी। वकीन ने मुझे सरेंडर कराया। कोर्ट से मुझे जमानत मिली। एक बार मुझे फुटबाॅल खेलते हुए बच्चे दिखे। मैं भी वहां खड़ा हो गया। तभी वहां विजय बारसे सर आए। मैं उन्हें देखकर आश्चर्य में पड़ गया। उन्होंने मुझे देखकर पूछा अभी क्या चालू है? मैने उनसे कहा जैसा मैं पहले था आज उससे भी ज्यादा बुरी स्थिति है।”

अभिषेक ने आमिर को बताया कि “उस दौरान बारसे सर ने कहा कुछ समय निकालकर बच्चों के साथ प्रैक्टिस किया करो। फिर मैं डिस्ट्रिक्ट लेवल के लिए खेला। मेरी परफाॅर्मेंस उन्हें अच्छी लगी। मुझे स्टेट लेवल के लिए चुन लिया गया। फिर मैने ज्यादा मेहनत की। मेरी परफाॅर्मेंस और अच्छी हो गई। इसके बाद इंडिया टीम में चयन हो गया।”

साॅकर टीम में ऐसे बच्चों का चयन-:
कार्यक्रम में आमिर खान ने अभिषेक से पूछा कि साॅकर टीम में कौन से बच्चे हिस्सा लेते हैं? अखिलेश ने जवाब दिया मेरे जैसे। मतलब जो गरीब बच्चे हैं, अंडरप्रिविलेज्ड बैकग्राउंड से, झोपड़पट्टी के बच्चे। इस दौरान आमिर खान ने कार्यक्रम में मौजूद आॅडियंस से बताया कि अभिषेक जी, ना सिर्फ हिंदुस्तान की टीम के लिए चयनित हुए, बल्कि हिंदुस्तानी टीम के कैप्टन भी बने। इसकी अगुआई में भारतीय टीम ने ब्राजील में हुए स्लम साॅकर वल्र्ड कप में हिस्सा भी लिया। 

मैं पढ़ा लिखा नहीं हूं लेकिन लोग मुझे सर कहते हैं, गर्व होता है-:
आपको बता दें कि अभिषेक पाॅल की परवरिश महाराष्ट्र के नागपुर की एक बस्ती में हुई थी। कम उम्र में ही उनका पाला गुंडागर्दी, शराब और ड्रग्स से पड़ गया। साथ ही साथ जुर्म की दुनिया ने भी उन्हें अपनी चपेट में ले लिया था। एक समय ऐसी स्थिति आ गई थी कि उनके ऊपर दर्जनों केस दर्ज हो गए थे। विरोधी गैंग भी उनकी जान की दुश्मन बनी हुई थी। लेकिन फुटबाॅल के खेल ने उनकी जिंदगी बदल कर रख दी। 

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