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उत्तरप्रदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट: फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में लंबित होने पर पुलिस को पुनर विवेचना का अधिकार कैसे?

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फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में लंबित होने पर पुलिस को पुनर विवेचना का अधिकार कैसे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट में पुलिस के इस कृत्य पर सवाल उठाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आपराधिक मामले में पुलिस की फाइनल रिपोर्ट और उस पर दाखिल प्रोटेस्ट अर्जी लंबित रहते हुए उसी की पुनर्विवेचना का आदेश देने का एसपी को अधिकार नहीं है।


कोर्ट ने कहा है कि ADG पुलिस वाराणसी, एस पी गाजीपुर व SHO सैदपुर का आचरण कानून के खिलाफ है। कोर्ट ने एसएचओ सैदपुर से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है और पूछा है कि जब फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में विचाराधीन है तो अपराध की पुनर्विवेचना का आदेश कैसे दिया।

कोर्ट ने कहा है कि यदि यह पाया गया कि अधिकारियों के दबाव में फिर से विवेचना का आदेश दिया गया है तो एडीजी पुलिस व एस पी गाजीपुर को कोर्ट तलब कर सफाई मागेगी। यदि एसएचओ सैदपुर हलफनामा नहीं दाखिल करते हैं तो दोनों अधिकारियों कोर्ट में हाजिर होगे।


कोर्ट ने पुनर्विवेचना के एस एच ओ के आदेश पर रोक लगा दी है। और4नवंबर तक जवाब मांगा है।
अधिवक्ता का कहना है कि मामला मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित होने के बावजूद इंस्पेक्टर सैदपुर ने एसपी गाजीपुर के 23 जुलाई 2020 के आदेश से विवेचक को इस मामले में अग्रिम विवेचना करने का आदेश दे दिया।

एसपी के आदेश में अपेक्षा की गई थी कि अग्रिम विवेचना कोर्ट की अनुमति लेकर की जाए। और इसके परिणाम से अवगत कराया जाए। मगर उनको अग्रिम विवेचना के परिणाम से अवगत नहीं कराया गया। इस नाराजगी जताते हुए एडीजी वाराणसी जोन ने अग्रिम विवेचना की रिपोर्ट दो दिन में उनके समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।


कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि पुलिस अधिकारियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है। एडीजी, एसपी और एसएचओ को फाइनल रिपोर्ट लंबित रहते हुए अग्रिम विवेचना का आदेश देने का अधिकार नहीं है। उनका कार्य विधि विरुद्ध है। मामले की अगली सुनवाई चार नवंबर को होगी।

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